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अदाणी मुद्दे पर सदन में संग्राम: सिंघार के आरोपों पर विजयवर्गीय का पलटवार, 5 मिनट स्थगित हुई कार्यवाही

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वास्तविकता दर्शन समाचार, 19 फरवरी 2026        भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार और अदाणी समूह के बीच हुए कथित समझौते का मुद्दा उठाते हुए बड़ा आरोप लगाया, जिस पर संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कड़ा पलटवार किया। बढ़ते हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। अदाणी को लेकर क्या बोले सिंघार? सदन में अपने संबोधन के दौरान उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि अदाणी समूह को बिजली खरीद के नाम पर अगले 25 वर्षों के लिए एक से सवा लाख करोड़ रुपये तक का भुगतान प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के आर्थिक हितों से जुड़ा गंभीर विषय है। इस पर विजयवर्गीय ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने की मांग की। जवाब में सिंघार ने कहा कि उनके पास प्रमाण हैं और वे प्रस्तुत करेंगे। इसी दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। अध्यक्ष की नसीहत: “गुस्सा चेहरे पर हो, मन में नहीं” स्थिति असहज होती ...

भारत में एक जगह ऐसी है, जहां उल्टी गंगा बहती है जाने कहां?

वास्तविकता दर्शन समाचार, 6 सितंबर 2020


     इंदौर। भारत में एक जगह ऐसी है जहां डेढ़ किलोमीटर तक गंगा उल्टी बहती है, वह स्थान है वाराणसी के घाटों का किनारा। गंगा में जब पानी अधिक बढ़ जाता है तब मणिकर्णिका घाट से तुलसी घाट तक लगभग डेढ़ किलोमीटर तक गंगा नदी उल्टी बहने लगती है। इन घाटों के बीच में हरिश्चन्द्र घाट सहित लगभग 45 घाट आते हैं। उल्टी बहने की स्थिति लगभग आधा से एक घंटे तक रहती है और वाकायदा पानी उतरता है अर्थात् जिस निशान पर पहले पानी बह रहा होता है उल्टी बहने पर दो से तीन फीट नीचे बहने लगता है। ये स्थिति भदैनी घाट के निकट जैन घाट की है। हरिश्चन्द्र घाट पर एक मीटर के लगभग पानी उतर जाता है। यह मंजर लोग घंटों तक घाट किनारे खड़े होकर निहारते रहते हैं। 


     वाराणसी में गंगा नदी का बहाव दक्षिण से उत्तर की ओर है। लेकिन यहां नगर के किनारे किनारे गंगा धनुषाकार में बहती हुई, दक्षिण दिशा से आकर पूर्व फिर पूर्वोतर की ओर घूम जाती है। आगे जाकर पुनः उत्तर दिशा की ओर रास्ता बनाती है। यहां घुमाव होने के कारण ही यह आश्चर्यकारी प्रक्रिया होती है। अधिक पानी आने के कारण गंगा का जल वेग से आता है। दशाश्वमेध घाट के पास अधिक घुमाव है, यहां पानी टकराता है, इस कारण भंवर सी बनती है। टकराने के कारण कुछ धारा उल्टी लौटती है, उल्टी धारा का बहाव भी इतना तेज होता है कि वह लगभग डेढ़ किलोमीटर तक उल्टा ही बहता रहता है, इस कारण पानी उतरता है। कुछ देर वाद पुनः सीधा बहने लगता है। यह प्रक्रिया थोड़ी थोड़ी देर से निरन्तर होती रहती है। गंगा में बाढ़ होने पर ही यह प्रक्रिया होती है। सामान्य समय में गंगाजी वाराणसी में शांत बहती हैं।


रिपोर्ट -डाॅ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’, इन्दौर, 9826091247


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