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अवैध मदिरा की 101 पेटी जप्त, जिलाबदर कुख्यात तस्कर के घर पर आबकारी का बड़ा एक्शन

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वास्तविकता दर्शन समाचार, इंदौर । मदिरा के अवैध रूप से क्रय-विक्रय, भण्डारण तथा परिवहन करने वालों के विरूद्ध इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए जिलाबदर कुख्यात तस्कर के घर पर छापा डालकर बड़ी मात्रा में अवैध मदिरा जप्त की गई।         यह कार्रवाई सहायक आयुक्त आबकारी अभिषेक तिवारी के मार्गदर्शन में कंट्रोलर देवेश चतुर्वेदी, डिप्टी कंट्रोलर मनोज अग्रवाल एवं फ्लाइंग स्क्वॉड प्रभारी कमलेश सोलंकी द्वारा वृत्त सांवेर अंतर्गत ग्राम बड़ोदिया खान में की गई। आबकारी विभाग द्वारा प्रभावी कार्रवाई करते हुए कुख्यात शराब तस्कर महेश उर्फ एन.डी. के निवास से अवैध मदिरा जप्त की गई। कार्यवाही के दौरान कुल 62 पेटी देशी मदिरा (558 बल्क लीटर), 35 पेटी विदेशी मदिरा स्प्रिट (315 बल्क लीटर) तथा 4 पेटी विदेशी मदिरा बीयर (48 लीटर) जप्त की गई। इस प्रकार कुल 101 पेटी देशी एवं विदेशी मदिरा, कुल 921 बल्क लीटर मदिरा बरामद की गई। उक्त आरोपी पूर्व में जिलाबदर भी रह चुका है, जिससे उसकी आपराधिक प्रवृत्ति स्पष्ट होती है।  उक्त कार्यवाही में आबकारी विभाग की टीम, जिसमें एडी...

गणतंत्र दिवस भाषण में आंबेडकर का नाम न लेने पर घिरे मंत्री गिरीश महाजन, महिला वन अधिकारी के विरोध के बाद मांगी माफी

 गणतंत्र दिवस भाषण में आंबेडकर का नाम न लेने पर घिरे मंत्री गिरीश महाजन, महिला वन अधिकारी के विरोध के बाद मांगी माफी 

वास्तविकता दर्शन समाचार, इंदौर 

          महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन को 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान अपने भाषण में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का नाम न लेने के कारण भारी विवाद का सामना करना पड़ा। यह मामला तब और गरमा गया जब नासिक में आयोजित परेड के दौरान महिला वन अधिकारी माधवी जाधव ने खुले मंच पर इस चूक पर आपत्ति जताई।

         माधवी जाधव ने मंत्री से सवाल किया कि संविधान निर्माता डॉ. आंबेडकर का नाम भाषण में क्यों नहीं लिया गया, और कहा कि वे इसके विरोध में निलंबन जैसी कार्रवाई से भी नहीं डरतीं। उनके इस साहसिक विरोध ने कार्यक्रम स्थल पर मौजूद अधिकारियों और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।

        विवाद बढ़ने के बाद मंत्री गिरीश महाजन ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे “अनजाने में हुई चूक” बताया और खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अपने भाषण में उन्होंने भारत माता और छत्रपति शिवाजी महाराज के नारे लगाए थे, लेकिन डॉ. आंबेडकर का नाम छूट जाना जानबूझकर नहीं था।

         हालांकि विपक्षी दलों ने इस स्पष्टीकरण को नकारते हुए इसे डॉ. आंबेडकर का अपमान करार दिया और मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की। विपक्ष का कहना है कि गणतंत्र दिवस जैसे अवसर पर संविधान निर्माता को नज़रअंदाज़ करना केवल भूल नहीं, बल्कि सोच का प्रतिबिंब है।

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