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अदाणी मुद्दे पर सदन में संग्राम: सिंघार के आरोपों पर विजयवर्गीय का पलटवार, 5 मिनट स्थगित हुई कार्यवाही

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वास्तविकता दर्शन समाचार, 19 फरवरी 2026        भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार और अदाणी समूह के बीच हुए कथित समझौते का मुद्दा उठाते हुए बड़ा आरोप लगाया, जिस पर संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कड़ा पलटवार किया। बढ़ते हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। अदाणी को लेकर क्या बोले सिंघार? सदन में अपने संबोधन के दौरान उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि अदाणी समूह को बिजली खरीद के नाम पर अगले 25 वर्षों के लिए एक से सवा लाख करोड़ रुपये तक का भुगतान प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के आर्थिक हितों से जुड़ा गंभीर विषय है। इस पर विजयवर्गीय ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने की मांग की। जवाब में सिंघार ने कहा कि उनके पास प्रमाण हैं और वे प्रस्तुत करेंगे। इसी दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। अध्यक्ष की नसीहत: “गुस्सा चेहरे पर हो, मन में नहीं” स्थिति असहज होती ...

गणतंत्र दिवस भाषण में आंबेडकर का नाम न लेने पर घिरे मंत्री गिरीश महाजन, महिला वन अधिकारी के विरोध के बाद मांगी माफी

 गणतंत्र दिवस भाषण में आंबेडकर का नाम न लेने पर घिरे मंत्री गिरीश महाजन, महिला वन अधिकारी के विरोध के बाद मांगी माफी 

वास्तविकता दर्शन समाचार, इंदौर 

          महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन को 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान अपने भाषण में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का नाम न लेने के कारण भारी विवाद का सामना करना पड़ा। यह मामला तब और गरमा गया जब नासिक में आयोजित परेड के दौरान महिला वन अधिकारी माधवी जाधव ने खुले मंच पर इस चूक पर आपत्ति जताई।

         माधवी जाधव ने मंत्री से सवाल किया कि संविधान निर्माता डॉ. आंबेडकर का नाम भाषण में क्यों नहीं लिया गया, और कहा कि वे इसके विरोध में निलंबन जैसी कार्रवाई से भी नहीं डरतीं। उनके इस साहसिक विरोध ने कार्यक्रम स्थल पर मौजूद अधिकारियों और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।

        विवाद बढ़ने के बाद मंत्री गिरीश महाजन ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे “अनजाने में हुई चूक” बताया और खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अपने भाषण में उन्होंने भारत माता और छत्रपति शिवाजी महाराज के नारे लगाए थे, लेकिन डॉ. आंबेडकर का नाम छूट जाना जानबूझकर नहीं था।

         हालांकि विपक्षी दलों ने इस स्पष्टीकरण को नकारते हुए इसे डॉ. आंबेडकर का अपमान करार दिया और मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की। विपक्ष का कहना है कि गणतंत्र दिवस जैसे अवसर पर संविधान निर्माता को नज़रअंदाज़ करना केवल भूल नहीं, बल्कि सोच का प्रतिबिंब है।

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